जैसे कभी माँ-बाप किसी मसरूफ हो तो बच्चे को झुन्झुना पकड़ा देते है कुछ वैसे ही क्लिनिकल पोस्टिंग्स में आये स्टूडेंट्स को डॉक्टर्स हिस्ट्री लेने को बोल देते हैं |इ .न.टी की ओ.पी.डी में मैं एक बूढी महिला के पास पहुंची |वो आंटी बड़ी अजीब मालूम होती थी, अपने में ही कुछ कुछ बोल के मुस्कुरा रही थी| चेहरे पे झुर्रियों का जाल बना हुआ था , एक गेरुए रंग के चादर में लिपटी हुई एक कोने में बैठी थी | कई बार पूछने पर भी जब उन्होंने नहीं बताया तो पता चला की सुनने की दिक्कत है | अब यहा से मेरी दिक्कते बढ़ गयी , इशारों से कुछ पूछती तो आस पास वाले हंसने लगते और ज्यों ही मेरी आवाज़ थोड़ी तेज़ होती आस पास के इंटर्न्स घूरने लगते | किसी तरह ये कार्यक्रम आगे चला और वो मेरे सवालों पे हाँ या न में सर हिला देती | बीच में मैं अपना पेन ढूंढने लगी तो उन्होंने पूछा की क्या चाहिए, पहली बार कुछ बोला उन्होंने| मैंने हलके से कहा कुछ नहीं पेन नहीं मिल रहा तो उसपे वो हंसी और बोली, " बाल में ठूस राख्या है तो कहा से मिलेगा "| मैं भी हंस दी पर मेरा माथा चकराया की इतनी देर से चीख चीख के पूछने पर कुछ बोल नहीं रही थी और ये सुनाई दे गया उन्हें| " अम्मा आपको सब सुनाई पड़ता है न तो आप क्यों आये हो "| वो घबरा सी गयी , थोड़ा रुक कर बोली ," मेरे बेटे से न कहियो , कुछ दिन पहले कुछ फंस गया रहा कान में बेटा और अपने आप ठीक भी हो गया पर बहुत आराम लगा मुझे उस वकत| बहु कोई काम करने को बोलती तो सुनाई नहीं पड़ता था , खुद खीज के चली जाती थी , न उसकी खङी खोटी सुननी पड़े थी | फिर एक दिन जब सुनने लगा अचानक ,मैं लेटी हुई थी और बेटा और बहु जो पीठ के पीछे बात करते थे सामने ही कर रहे थे | मुझे कहीं छोड़ आने की कह रहे थे ठीक होने के बाद, पहले लगता था के बहु ही बोलती हैं तो सुन जाती थी , उस दिन लगा की बहरा रहना ही ठीक हैं | ये लोग भी लगे हैं जगह जगह दिखवाने में , पूरे पुर्ज़ो में छोड़ेंगे ,ऐसे थोड़े न | बहुत अच्छा भी लगे हैं ऐसे रहने में , लोगो को देखने में , अपने बारे में सुनने में , चीज़े अलग लगे हैं | खुश रहूं हूँ पहले से ज्यादा और भेज दे ये जहाँ भी भेजना हैं इन्हे ,मुझे कोई दर न हैं , बस दर लगे हैं वो सुनने में के क्या बोलके भेजेगा मेरा बेटा , बस वो सुनना बड़ा भारी लगेगा , मुझ बहरी को बहरा ही छोड़ दे बेटी |"
Thursday, 30 August 2018
शोर की उम्र होती है , ख़ामोशी सदाबहार है
जैसे कभी माँ-बाप किसी मसरूफ हो तो बच्चे को झुन्झुना पकड़ा देते है कुछ वैसे ही क्लिनिकल पोस्टिंग्स में आये स्टूडेंट्स को डॉक्टर्स हिस्ट्री लेने को बोल देते हैं |इ .न.टी की ओ.पी.डी में मैं एक बूढी महिला के पास पहुंची |वो आंटी बड़ी अजीब मालूम होती थी, अपने में ही कुछ कुछ बोल के मुस्कुरा रही थी| चेहरे पे झुर्रियों का जाल बना हुआ था , एक गेरुए रंग के चादर में लिपटी हुई एक कोने में बैठी थी | कई बार पूछने पर भी जब उन्होंने नहीं बताया तो पता चला की सुनने की दिक्कत है | अब यहा से मेरी दिक्कते बढ़ गयी , इशारों से कुछ पूछती तो आस पास वाले हंसने लगते और ज्यों ही मेरी आवाज़ थोड़ी तेज़ होती आस पास के इंटर्न्स घूरने लगते | किसी तरह ये कार्यक्रम आगे चला और वो मेरे सवालों पे हाँ या न में सर हिला देती | बीच में मैं अपना पेन ढूंढने लगी तो उन्होंने पूछा की क्या चाहिए, पहली बार कुछ बोला उन्होंने| मैंने हलके से कहा कुछ नहीं पेन नहीं मिल रहा तो उसपे वो हंसी और बोली, " बाल में ठूस राख्या है तो कहा से मिलेगा "| मैं भी हंस दी पर मेरा माथा चकराया की इतनी देर से चीख चीख के पूछने पर कुछ बोल नहीं रही थी और ये सुनाई दे गया उन्हें| " अम्मा आपको सब सुनाई पड़ता है न तो आप क्यों आये हो "| वो घबरा सी गयी , थोड़ा रुक कर बोली ," मेरे बेटे से न कहियो , कुछ दिन पहले कुछ फंस गया रहा कान में बेटा और अपने आप ठीक भी हो गया पर बहुत आराम लगा मुझे उस वकत| बहु कोई काम करने को बोलती तो सुनाई नहीं पड़ता था , खुद खीज के चली जाती थी , न उसकी खङी खोटी सुननी पड़े थी | फिर एक दिन जब सुनने लगा अचानक ,मैं लेटी हुई थी और बेटा और बहु जो पीठ के पीछे बात करते थे सामने ही कर रहे थे | मुझे कहीं छोड़ आने की कह रहे थे ठीक होने के बाद, पहले लगता था के बहु ही बोलती हैं तो सुन जाती थी , उस दिन लगा की बहरा रहना ही ठीक हैं | ये लोग भी लगे हैं जगह जगह दिखवाने में , पूरे पुर्ज़ो में छोड़ेंगे ,ऐसे थोड़े न | बहुत अच्छा भी लगे हैं ऐसे रहने में , लोगो को देखने में , अपने बारे में सुनने में , चीज़े अलग लगे हैं | खुश रहूं हूँ पहले से ज्यादा और भेज दे ये जहाँ भी भेजना हैं इन्हे ,मुझे कोई दर न हैं , बस दर लगे हैं वो सुनने में के क्या बोलके भेजेगा मेरा बेटा , बस वो सुनना बड़ा भारी लगेगा , मुझ बहरी को बहरा ही छोड़ दे बेटी |"
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