बिस्तर की तीख़ी सी सिलवटे
परदों के कोने से झाकती रोशनी
दिवार पर टिक टिक करती घड़ी
बगल में खुली पड़ी एक किताब
नींद की बची मोहलत का हिसाब
जुगनुओं की चमक सूरज में फिर खो गई
देखो फिर एक नई सुबह हो गई हैं
बाहर की वो होड़ और खलबली
खिड़की से ताकती हुई वो छिपकली
फिर एक अधूरा टूटा ख़्वाब
डायरी के पन्नों में पड़ा सूखा ग़ुलाब
पलकों पर लिपटा अलसाया आँचल
आँखों के नीचे बिखरा काजल
रात की वो फ़िज़ा फिर कही खो गई
देखो फिर एक नई सुबह हो गई
पर नींद के घरोंदे को जोड़ते हुए
सारी जद्दोजहद से मुँह मोड़ते हुए
दूसरी ओर करवट लेकर हमने चादर फिर खींच ली
उस ख्वाब को पूरा करने की ज़िद में आँखे फिर मींच ली
दिवार पर टिक टिक करती घड़ी
बगल में खुली पड़ी एक किताब
नींद की बची मोहलत का हिसाब
जुगनुओं की चमक सूरज में फिर खो गई
देखो फिर एक नई सुबह हो गई हैं
बाहर की वो होड़ और खलबली
खिड़की से ताकती हुई वो छिपकली
फिर एक अधूरा टूटा ख़्वाब
डायरी के पन्नों में पड़ा सूखा ग़ुलाब
पलकों पर लिपटा अलसाया आँचल
आँखों के नीचे बिखरा काजल
रात की वो फ़िज़ा फिर कही खो गई
देखो फिर एक नई सुबह हो गई
पर नींद के घरोंदे को जोड़ते हुए
सारी जद्दोजहद से मुँह मोड़ते हुए
दूसरी ओर करवट लेकर हमने चादर फिर खींच ली
उस ख्वाब को पूरा करने की ज़िद में आँखे फिर मींच ली
नींद की पनाह में हमें फिर से खोने दो
जागे हैं हम बड़ी देर से कुछ देर सोने दो
सपनों की जागीर को ऐसे कैसे निसार करें
सुबह से कह दो अभी ये थोड़ा और इंतज़ार करें
जागे हैं हम बड़ी देर से कुछ देर सोने दो
सपनों की जागीर को ऐसे कैसे निसार करें
सुबह से कह दो अभी ये थोड़ा और इंतज़ार करें
